दिया बुझने से पहले ,एक लौ तुम जला लो।
| | सारे जहां से अच्छा हिंदुस्ताँ हमारा, फिर भी क्यों ना जाने हम पिछड़ रहे हैं; देश जा रहा है अवनति की राह पर, और हम देशवासी आपस मे लड़ रहे हैं। भ्रष्टाचार के कीड़े, देश को खा रहे हैं, और ‘सारे जहां से अच्छा’ हम गा रहे हैं; ना कहने से काम होगा, दो कदम तुम बढ़ा लो; यह देश है तुम्हारा, इसको तुम बचा लो। आज फिर वो समय है, जब राजा झगड़ रहे हैं, स्वार्थ की सीढ़ी पर तेजी से बढ़ रहे हैं; डरता हुँ यह सोच कर कहीं- फिर कोई East Indiaअपने पैर ना जामा ले, मेरे प्यारे देश को कोई अपना न बना ले। उठने लायक ना रहो उससे पहले, अपने आप को तुम जगा लो; दिया बुझने से पहले - एक लौ तुम जला लो। |